Sunday, April 27, 2014

नब्बे साल के बूढ़े की उमर

  

नब्बे साल का था एक बूढ़ा
दिखने में पर सौ का पूरा,
बाल-बच्चे बाहर रहते हैं
'घर नहीं आना', कहते हैं

पत्नी ने पहले साथ छोड़ा
अब किस्मत ने मुंह मोड़ा
रोग ऐसा चढा बेनाम
पैसा-पैसा हुआ हराम

पाई-पाई को जब मुंहताज हुए
देने वाले भी नाराज हुए
बोला किसी  ने बाबा जाओ
वृद्धा-पेंशन में अर्जी लगाओ

पहुंचे तीन पैरोँ पर दफ्तर
दिन भर में दस मील चलकर
बाबू बोले बाद मे आना
आज बहुत है काम पुराना

अगले दिन जब पहुंचेदफ़्तर
न बाबू मिले न मिले अफ़सर
दस राउंड जब बाबा का लगा
तब आवेदन लाइन मेँ लगा

अब तो बाबा रात वहीँ बिताते
ऑफिस के बाहर एक पन्नी बिछाते
बाबा रोज अब ऑफिस आते
उदास मन से बैठ जाते

बाबू का भी दिल पसीजा
फ़ाइल अधिकारी के साइन को भेजा
अधिकारी थे काम पसन्द
साइन कर के लौटाया तुरन्त

बाबा की सूजी आँखें हरी हुईं
पाँच सौ मासिक, सोचा किस्मत सही हुई
पर बाबू बोले अभी नहीं जनाब
एक्सरे करा के आइये आप

जानेंगे कैसे कि आप अस्सी पार हैँ
सरकारी काम का दस्तावेज़ आधार है
बाबा बोले बाबू को बेटा
 इस  उमर में करूंगा क्या काम झूठा

नब्बे बरस फाल्गुन में हुए
अब एक्सरा कहाँ कराते फिरें
लेकिन बाबू फ़िर भी ना माने
बाबा की हालत किया अनजाना

बाबा ने फ़िर कराया एक्सरा
दो माह चक्कर और लगाना पड़ा
तब जाकर आज बाबा की फ़ाइल तैयार  है
कागज़ दुरुस्त, तसल्ली में   सरकार है

 पांच सौ लेकर खुद बाबू खडे हैँ
पर बाबा ज़मीन पर झुके पड़े हैं
न अावाज़, न नब्ज न क़ोई हलचल
बाबा को मिला है पेंशन माँगने का फल